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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 50 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 4

9.50.4

Mantra ID: 9.50.4

आ प॑वस्व मदिन्तम प॒वित्रं॒ धार॑या कवे । अ॒र्कस्य॒ योनि॑मा॒सद॑म् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.50.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय नशीले एवं क्रांत-कर्म वाले सोम! तुम पूजा के योग्य इंद्र का स्थान पाने के लिए धारा के रूप में दशापवित्र पर गिरो. (४)

EN English Translation

O very intoxicating and revolutionary mon! You fall on Dashapavitra as stream to get the place of Indra worthy of worship. (4)

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