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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 55 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 2

9.55.2

Mantra ID: 9.55.2

इन्दो॒ यथा॒ तव॒ स्तवो॒ यथा॑ ते जा॒तमन्ध॑सः । नि ब॒र्हिषि॑ प्रि॒ये स॑दः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.55.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोमरूप अन्न! तुम अपनी स्तुतियों एवं जन्म के अनुरूप हमारे यज्ञ में अपने प्रिय कुशों पर बैठो. (२)

EN English Translation

O Somrupa Food! You sit on your beloved kushas in our yajna in accordance with your praises and birth. (2)

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