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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 56 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 56 • ऋचा / मन्त्र 1

9.56.1

Mantra ID: 9.56.1

परि॒ सोम॑ ऋ॒तं बृ॒हदा॒शुः प॒वित्रे॑ अर्षति । वि॒घ्नन्रक्षां॑सि देव॒युः ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.56.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शीघ्रगति वाले व देवों के अभिलाषी सोम दशापवित्र पर स्थित होकर राक्षसों को नष्ट करते हैं एवं हमें विशाल अन्न देते हैं. (१)

EN English Translation

The fast-paced and desiring mons of the gods, situated on the dashapavittra, destroys the demons and gives us huge food. (1)

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