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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 61 • Mantra / Rik 28

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 28

9.61.28

Mantra ID: 9.61.28

पव॑स्वेन्दो॒ वृषा॑ सु॒तः कृ॒धी नो॑ य॒शसो॒ जने॑ । विश्वा॒ अप॒ द्विषो॑ जहि ॥ (२८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.61.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे निचुड़े हुए एवं सींचने वाले सोम! तुम धारा के रूप में टपको, हमें जनपदों में यशस्वी बनाओ तथा सभी शत्रुओं को मारो. (२८)

EN English Translation

O som who is lying down and watering! You tap as a stream, make us successful in the districts and kill all the enemies. (28)

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