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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 64 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 11

9.64.11

Mantra ID: 9.64.11

ऊ॒र्मिर्यस्ते॑ प॒वित्र॒ आ दे॑वा॒वीः प॒र्यक्ष॑रत् । सीद॑न्नृ॒तस्य॒ योनि॒मा ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.64.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम्हारी देवाभिलाषिणी लहरें यज्ञ के स्थान में दशापवित्र पर बैठती हैं. (११)

EN English Translation

Hey Mon! Your devabhilashani waves sit on the dashapavitra in the place of the yajna. (11)

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