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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 65 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 65 • ऋचा / मन्त्र 15

9.65.15

Mantra ID: 9.65.15

यस्य॑ ते॒ मद्यं॒ रसं॑ ती॒व्रं दु॒हन्त्यद्रि॑भिः । स प॑वस्वाभिमाति॒हा ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.65.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम्हारे जल्दी नशा करने वाले जिस रस को अध्वर्यु पत्थरों की सहायता से दुहते हैं, तुम शत्रुओं का हनन करते हुए उसी रस को बरसाओ. (१५)

EN English Translation

Hey Mon! The juice that your quick drunkards milk with the help of stones, you rain the same juice, violating the enemies. (15)

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