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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 66 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 10

9.66.10

Mantra ID: 9.66.10

पव॑मानस्य ते कवे॒ वाजि॒न्सर्गा॑ असृक्षत । अर्व॑न्तो॒ न श्र॑व॒स्यवः॑ ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.66.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे क्रांत बुद्धि वाले एवं अन्नयुक्त सोम! जब तुम दशापवित्र से छनते हो, तब यजमानों के लिए अन्न लाने की इच्छुक तुम्हारी धाराएं घोड़ों के समान दौड़ती हैं. (१०)

EN English Translation

O krant wise and annadyukta som! When you are filtered out of the dashapavitra, your streams, who are willing to bring food for the hosts, run like horses. (10)

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