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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 66 • Mantra / Rik 23

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 23

9.66.23

Mantra ID: 9.66.23

स म॑र्मृजा॒न आ॒युभिः॒ प्रय॑स्वा॒न्प्रय॑से हि॒तः । इन्दु॒रत्यो॑ विचक्ष॒णः ॥ (२३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.66.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मनुष्यों द्वारा बार-बार निचोड़े जाते हुए अन्न के स्वामी, यजमान के लिए हितैषी एवं सबके द्रष्टा सोम देवों के समीप सदा जाते है. (२३)

EN English Translation

The lord of the food, who is repeatedly squeezed by human beings, friendly to the host and the seer of all, always goes to the Soma Devas. (23)

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