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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 66 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 3

9.66.3

Mantra ID: 9.66.3

परि॒ धामा॑नि॒ यानि॑ ते॒ त्वं सो॑मासि वि॒श्वतः॑ । पव॑मान ऋ॒तुभिः॑ कवे ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.66.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शुद्ध होते हुए एवं क्रांतकर्म वाले सोम! तुम्हारा तेज चारों ओर फैला है. तुम ऋतुओं के साथ सुशोभित हो. (३)

EN English Translation

O mon of pureness and krantakarma! Your speed is spread around. You're embellished with the seasons. (3)

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