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9.67.15
परि॒ प्र सो॑म ते॒ रसोऽस॑र्जि क॒लशे॑ सु॒तः । श्ये॒नो न त॒क्तो अ॑र्षति ॥ (१५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 9.67.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! तुम्हारा रस द्रोणकलश में छनकर चमस आदि पात्रों में विभक्त होता है तथा बाज पक्षी के समान शीघ्रता से इंद्र के पास जाता है. (१५)
EN English Translation
Hey Mon! Your juice is filtered in dronaclash and divided into spoons, etc., containers and goes to Indra as quickly as a hawk bird. (15)