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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 69 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 69 • ऋचा / मन्त्र 4

9.69.4

Mantra ID: 9.69.4

उ॒क्षा मि॑माति॒ प्रति॑ यन्ति धे॒नवो॑ दे॒वस्य॑ दे॒वीरुप॑ यन्ति निष्कृ॒तम् । अत्य॑क्रमी॒दर्जु॑नं॒ वार॑म॒व्यय॒मत्कं॒ न नि॒क्तं परि॒ सोमो॑ अव्यत ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.69.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार वीर्यसेचन करने वाला बैल गरजता है तथा गाएं उसकी ओर जाती हैं, उसी प्रकार शब्द करके द्रोणकलश में जाने वाले सोम का अनुगमन धाराएं करती हैं. सोम सफेद रंग वाले एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करते हैं एवं अपने कवच के समान दूध से अपने को ढकते हैं. (४)

EN English Translation

Just as the ox that ejaculates thunders and sings towards it, so the words follow the mon who goes to Dronakalash. Mon crosses the dashapavitra made of white coloured and sheep's hair and covers himself with milk like his armor. (4)

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