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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 70 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 70 • ऋचा / मन्त्र 4

9.70.4

Mantra ID: 9.70.4

स मृ॒ज्यमा॑नो द॒शभिः॑ सु॒कर्म॑भिः॒ प्र म॑ध्य॒मासु॑ मा॒तृषु॑ प्र॒मे सचा॑ । व्र॒तानि॑ पा॒नो अ॒मृत॑स्य॒ चारु॑ण उ॒भे नृ॒चक्षा॒ अनु॑ पश्यते॒ विशौ॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.70.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम शोभन-कर्मो वाली दस उंगलियों द्वारा मसले जाकर लोकों को देखने के लिए अंतरिक्षस्थित मध्यमा वाकू में रहते हैं. मनुष्यों को देखने वाले सोम कल्याणकारी जल की वर्षा के लिए यज्ञकर्मो की रक्षा करते हुए अंतरिक्ष से मानवों और देवों दोनों को देखते हैं. (४)

EN English Translation

Som shobhan-karmo lives in the spaced middle-minded viku to see the people by going through ten fingers. The soms who see humans see both humans and gods from space while protecting the yagnakarmo for the rain of welfare water. (4)

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