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9.70.3
ते अ॑स्य सन्तु के॒तवोऽमृ॑त्य॒वोऽदा॑भ्यासो ज॒नुषी॑ उ॒भे अनु॑ । येभि॑र्नृ॒म्णा च॑ दे॒व्या॑ च पुन॒त आदिद्राजा॑नं म॒नना॑ अगृभ्णत ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.70.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सोम का ज्ञान कराने वाली, मरणरहित एवं हिंसित न होने वाली किरणें स्थावर-जंगम दोनों की रक्षा करें. इन्हीं ज्ञापक किरणों द्वारा सोम बल एवं देवयोग्य अन्न देते हैं. निचोड़ने की क्रिया के बाद ही दीप्तिशाली सोम को उत्तम स्तुतियां मिलती हैं. (३)
EN English Translation
The rays that give knowledge of the mon, the deathless and the unmoving rays protect both real and movable. Through these gynaak rays, soma gives strength and godly food. It is only after the act of squeezing that the radiant Som gets the best praises. (3)