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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 77 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 77 • ऋचा / मन्त्र 1

9.77.1

Mantra ID: 9.77.1

ए॒ष प्र कोशे॒ मधु॑माँ अचिक्रद॒दिन्द्र॑स्य॒ वज्रो॒ वपु॑षो॒ वपु॑ष्टरः । अ॒भीमृ॒तस्य॑ सु॒दुघा॑ घृत॒श्चुतो॑ वा॒श्रा अ॑र्षन्ति॒ पय॑सेव धे॒नवः॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.77.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के वज्र के समान, मधुर रस युक्त एवं बीजों को बोने वालों में श्रेष्ठ सोम द्रोणकलश में शब्द करते हैं. फलों का दोहन करने वाली, जल बरसाने वाली एवं शब्द करने वाली सोमकिरणें रंभाती हुई गायों के समान जाती हैं. (१)

EN English Translation

Like indra's thunderbolt, the best of those who have sweet juices and sow seeds, som speaks the word in dronakalash. Fruit-tapping, water-pouring and word-making somkirans are like ramming cows. (1)

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