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9.86.2
प्र ते॒ मदा॑सो मदि॒रास॑ आ॒शवोऽसृ॑क्षत॒ रथ्या॑सो॒ यथा॒ पृथ॑क् । धे॒नुर्न व॒त्सं पय॑सा॒भि व॒ज्रिण॒मिन्द्र॒मिन्द॑वो॒ मधु॑मन्त ऊ॒र्मयः॑ ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! मदकारक, व्याप्त एवं घोड़े के समान तेज चलने वाले रस अलग-अलग बनाए जाते हैं. वे मधुर व अधिक रस वाले सोम वञ्जधारी इंद्र के पास उसी प्रकार जाते हैं, जिस प्रकार दुधारू गाय बछड़े के पास जाती है. (२)
EN English Translation
Hey Mon! The juices that are made separately are made as thick, pervasive and fast as a horse. They go to the sweet and more juiced Som Vanjadhari Indra in the same way that the milch cow goes to the calf. (2)