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9.86.3
अत्यो॒ न हि॑या॒नो अ॒भि वाज॑मर्ष स्व॒र्वित्कोशं॑ दि॒वो अद्रि॑मातरम् । वृषा॑ प॒वित्रे॒ अधि॒ सानो॑ अ॒व्यये॒ सोमः॑ पुना॒न इ॑न्द्रि॒याय॒ धाय॑से ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! तुम प्रेरित अश्व के समान संग्राम में जाओ. हे सब जानने वाले सोम! तुम द्युलोक से जल के निर्माता द्रोणकलश के पास जाओ. वर्षा करने वाले सोम के धारणकर्ता इंद्र के लिए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर शुद्ध होते हैं. दशापवित्र पर्वत की चोटी के समान ऊंचा है. (३)
EN English Translation
Hey Mon! You go into the inspired horse-like sangram. O all those who know Mon! You go to Dronakalash, the maker of water from Dolok. The rainers are purified on the dashapavitra made of sheep's hair for Indra, the holder of the soma. Dashapavitra is as high as the peak of the mountain. (3)