Popular:
ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 88 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 5

9.88.5

Mantra ID: 9.88.5

अ॒ग्निर्न यो वन॒ आ सृ॒ज्यमा॑नो॒ वृथा॒ पाजां॑सि कृणुते न॒दीषु॑ । जनो॒ न युध्वा॑ मह॒त उ॑प॒ब्दिरिय॑र्ति॒ सोमः॒ पव॑मान ऊ॒र्मिम् ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 9.88.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस तरह अग्नि वन में उत्पन्न होकर अपनी शक्ति दिखाते हैं, उसी तरह सोम जल में पैदा होकर अपना बल दिखाते हैं. सोम युद्ध करने वाले वीर के समान शत्रु के पास भयंकर शब्द करते हुए अधिक रस को प्रेरित करते हैं. (५)

EN English Translation

Just as agni shows his power by being born in the forest, so som is born in water and shows his strength. The soms inspire more rasa by making fierce words to the enemy like the warr. (5)

卐 HinduText AI