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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 94 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 94 • ऋचा / मन्त्र 3

9.94.3

Mantra ID: 9.94.3

परि॒ यत्क॒विः काव्या॒ भर॑ते॒ शूरो॒ न रथो॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । दे॒वेषु॒ यशो॒ मर्ता॑य॒ भूष॒न्दक्षा॑य रा॒यः पु॑रु॒भूषु॒ नव्यः॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.94.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बुद्धिमान्‌ सोम जब स्तोत्रों की ओर जाते हैं, तब वे शूर के रथ के समान विविध प्रकार का गमन करते हैं. सोम देवों का धन स्तोता को देते हैं. सोम अपने द्वारा दिए गए धन की वृद्धि के लिए अनेक यज्ञशालाओं में स्तुति के विषय बनते हैं. (३)

EN English Translation

When the wise som goes to the hymns, he makes a variety of journeys like the chariot of the knight. The wealth of the Mon gods gives to the stota. Som becomes a subject of praise in many yagnashalas for the growth of the wealth he gives. (3)

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