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9.96.7
प्रावी॑विपद्वा॒च ऊ॒र्मिं न सिन्धु॒र्गिरः॒ सोमः॒ पव॑मानो मनी॒षाः । अ॒न्तः पश्य॑न्वृ॒जने॒माव॑रा॒ण्या ति॑ष्ठति वृष॒भो गोषु॑ जा॒नन् ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.96.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
शुद्ध होते हुए सोम लहरों वाली नदी के समान मन से उत्पन्न स्तुतियों को प्रेरित करते हैं. जल बरसाने वाले एवं गायों को जानने वाले सोम छिपी हुई वस्तुओं को देखते हुए दुर्बलों द्वारा निवारण न करने योग्य बल का सहारा लेते हैं. (७)
EN English Translation
Being purified inspires the hymns generated by the mind like a river with waves. Som, who showers water and knows cows, resorts to an unavoidable force by the weak, in view of the hidden objects. (7)