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9.98.3
परि॒ ष्य सु॑वा॒नो अ॑क्षा॒ इन्दु॒रव्ये॒ मद॑च्युतः । धारा॒ य ऊ॒र्ध्वो अ॑ध्व॒रे भ्रा॒जा नैति॑ गव्य॒युः ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.98.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
निचोड़े जाते हुए सोम देवों के द्वारा नशे के लिए प्रेरित होकर भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर सब ओर से छनते हैं. यज्ञ में प्रमुख गाय की अभिलाषा करने वाले सोम जिस प्रकार धारा के रूप में जाते हैं, उसी तेजपूर्ण दीप्ति के साथ अंतरिक्ष में जाते हैं. (३)
EN English Translation
Being squeezed, som is inspired by the gods to get drunk and sifts from all sides on the dashapavittra made of sheep's hair. The way Som, who aspires for the dominant cow in the yagna, goes into space with the same bright glow as the stream. (3)