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10.4.3
वयं घ त्वा सुतावन्त आपो न वृक्तबर्हिषः । पवित्रस्य प्रस्रवणेषु वृत्रहन्परि स्तोतार आसते ॥ (३)
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सामवेद मन्त्र 10.4.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! आप शत्रुनाशी हैं. हम सोमरस को जलप्रवाह की भांति आप के पास प्रवाहित कर के लाते हैं. हम आप को परिष्कृत सोमरस चढ़ाते तथा विराजने के लिए आप को कुश का आसन भेंट करते हैं. (३)
EN English Translation
O Indra! You are an enemy. We bring somers to you like a water flow. We offer you a refined somerasa and offer you the seat of Kush to sit. (3)