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सामवेद

Chapter / Prapathak 10 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 10 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 8

10.5.8

Mantra ID: 10.5.8

तपोष्पवित्रं विततं दिवस्पदेऽर्चन्तो अस्य तन्तवो व्यस्थिरन् । अवन्त्यस्य पवीतारमाशवो दिवः पृष्ठमधि रोहन्ति तेजसा ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 10.5.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र हैं. आप दुश्मनों को तपाने के लिए स्वर्गलोक में फैले हुए हैं. आप की किरणें चमकीली हैं. ये चमकीली किरणें स्वर्गलोक के पीछे स्थित हैं और यजमानों की रक्षा करती हैं. (८)

EN English Translation

O Mon! You are holy. You are spread across paradise to tap enemies. Your rays are bright. These bright rays are located behind paradise and protect the hosts. (8)

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