Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 11 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 11 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 6

11.1.6

Mantra ID: 11.1.6

पवमानस्य ते रसो दक्षो वि राजति द्युमान् । ज्योतिर्विश्वँ स्वर्दृशे ॥ (६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 11.1.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र हैं. आप का रस बलवान व चमकीला है. आप सर्वत्र व्याप्त एवं आप का प्रकाश (ज्योति) सर्वत्र दिखाई देता है. (६)

EN English Translation

O Mon! You are holy. Your juice is strong and bright. You are everywhere and your light (light) is visible everywhere. (6)

卐 HinduText AI