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सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 5

12.1.5

Mantra ID: 12.1.5

केतुं कृण्वं दिवस्परि विश्वा रूपाभ्यर्षसि । समुद्रः सोम पिन्वसे ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 12.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप सर्वव्यापक और स्वर्गलोक के ऊपर किरणों के रूप में व्याप्त हैं. आप बरसात के रूप में पानी बरसा कर हमें संपन्नता देते हैं. (५)

EN English Translation

O Mon! You are omnipresent and pervaded as rays over paradise. You give us prosperity by showering water in the form of rain. (5)

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