Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 1

12.5.1

Mantra ID: 12.5.1

इन्द्रो मदाय वावृधे शवसे वृत्रहा नृभिः । तमिन्महत्स्वाजिषूतिमर्भे हवामहे स वाजेषु प्र नोऽविषत् ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 12.5.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप मददाता व वृत्रनाशक हैं. आप अपने रक्षा साधनों से हमें बलवान बना सकते हैं. हम आप से उन रक्षा साधनों सहित युद्धों में अपनी रक्षा करने का अनुरोध करते हैं. आप हमारी रक्षा करने की कृपा कीजिए. (१)

EN English Translation

O Indra! You are a helper and a chronicler. You can make us strong with your defence tools. We request you to defend yourself in wars, including those defence instruments. Please protect us. (1)

卐 HinduText AI