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सामवेद

Chapter / Prapathak 12 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 12 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 4

12.5.4

Mantra ID: 12.5.4

स्वादोरित्था विषूवतो मध्वः पिबन्ति गौर्यः । या इन्द्रेण सयावरीर्वृष्णा मदन्ति शोभसे वस्वीरनु स्वराज्यम् ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 12.5.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! सूर्य की किरणें सुस्वादु और मीठे सोमरस को पीती हैं. सूर्य की ये किरणें आप के पास सुशोभित होती हैं अर्थात्‌ अपने ही राज्य में निवास करती हैं. (४)

EN English Translation

O Indra! The sun's rays drink the luscious and sweet somers. These rays of the sun adorn you, that is, reside in your own kingdom. (4)

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