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13.6.5
यस्य त इन्द्रः पिबाद्यस्य मरुतो यस्य वार्यमणा भगः । आ येन मित्रावरुणा करामह एन्द्रमवसे महे ॥ (५)
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सामवेद मन्त्र 13.6.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! आप के दिव्य रस को मरुत्, इंद्र अर्यमा, भग आदि पीते हैं. आप सुरक्षा हेतु जैसे मित्र और वरुण को बुलाते हैं, उसी प्रकार हम इंद्र को बुलाते हैं. (५)
EN English Translation
O Mon! You drink your divine juice marut, indra aryama, bhaga etc. Just like you call friend and Varun for safety, we call Indra. (5)