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सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 2

14.4.2

Mantra ID: 14.4.2

प्र वो धियो मन्द्रयुवो विपन्युवः पनस्युवः संवरणेष्वक्रमुः । हरिं क्रीडन्तमभ्यनूषत स्तुभोऽभि धेनवः पयसेदशिश्रयुः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 14.4.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! जो यजमान बुद्धिपूर्वक आप को परिष्कृत करते हैं, वे आनंदपूर्वक अपनी इच्छापूर्ति का लाभ पाते हैं. गौएं अपने दूध से सोमरस को सींचती हैं. वह खेलता (लहराता) हुआ घड़े में पहुंचता है. (२)

EN English Translation

O Mon! The hosts who refine you wisely enjoy their desire. Cows irrigate somers with their milk. He reaches the pitcher playing (waving). (2)

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