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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 4

15.1.4

Mantra ID: 15.1.4

एते सोमा अभि प्रियमिन्द्रस्य काममक्षरन् । वर्धन्तो अस्य वीर्यम् ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 15.1.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये सोम इंद्र को प्रिय हैं. सोम कामनाओं की वर्षा करते हैं. ये उन के (इंद्र के) वीर्य को बढ़ाने वाले हैं. (४)

EN English Translation

These are dear to Som Indra. Som showers wishes. These are going to increase his (Indra's) semen. (4)

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