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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 3

15.4.3

Mantra ID: 15.4.3

अव्या वारैः परि प्रियँ हरिँ हिन्वन्त्यद्रिभिः । पवमानं मधुश्चुतम् ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 15.4.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र हैं व मधु चुआते हैं. यजमान आप को पत्थर से कूट कर रस निकालते हैं. आप को जल से निमग्न कर देते हैं. आप को भेड़ के बालों से बनी छलनी से छान कर परिष्कृत किया जाता है. (३)

EN English Translation

O Mon! You are holy and you are sweet. The host crushes you with a stone and extracts juice. They submerge you with water. You are refined by filtering with a sieve made of sheep's hair. (3)

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