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सामवेद

Chapter / Prapathak 15 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 15 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 2

15.7.2

Mantra ID: 15.7.2

तव त्य इन्दो अन्धसो देवा मधोर्व्याशत । पवमानस्य मरुतः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 15.7.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप पवित्र व मधुमय हैं. इंद्र और मरुद्गण आप के इस सोमरस को पीते हैं. (२)

EN English Translation

O Mon! You are pure and sweet. Indra and Marudgana drink this someras of yours. (2)

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