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सामवेद

Chapter / Prapathak 16 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 16 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 3

16.1.3

Mantra ID: 16.1.3

महत्तत्सोमो महिषश्चकारापां यद्गर्भोऽवृणीत देवान् । अदधादिन्द्रे पवमान ओजोऽजनयत्सूर्ये ज्योतिरिन्दुः ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 16.1.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम ने सूर्य में प्रकाश उत्पन्न किया. इंद्र में ओज स्थापित किया. ये जल के गर्भ स्वरूप और महानतम हैं. सोम ने बहुत से कार्य किए हैं. (३)

EN English Translation

Som generated light in the sun. Indra established oz in. They are the womb form of water and the greatest. Som has done a lot of work. (3)

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