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सामवेद

Chapter / Prapathak 19 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 19 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 4

19.3.4

Mantra ID: 19.3.4

इन्द्र क्रतुं न आ भर पिता पुत्रेभ्यो यथा । शिक्षा णो अस्मिन्पुरुहूत यामनि जीव ज्योतिरशीमहि ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 19.3.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! पिता जैसे पुत्रों का लालनपालन करता है, वैसे ही आप हमारा पोषण कीजिए. आप हमें यज्ञ के श्रेष्ठ फल प्रदान कीजिए. हम जीवों को आप दिव्य ज्योति दीजिए. हम और अनेक लोग सहायता के लिए आप को पुकारते रहते हैं. (४)

EN English Translation

O Indra! Just as the father nurtures sons, so you nurture us. You give us the best fruits of yajna. Give you divine light to us creatures. We and many people keep calling on you for help. (4)

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