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सामवेद

Chapter / Prapathak 2 • Dashati / Sukta 11 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 2 • दशती / सूक्त 11 • मन्त्र 7

2.11.7

Mantra ID: 2.11.7

आ नो मित्रावरुणा घृतैर्गव्यूतिमुक्षतम् । मध्वा रजाँसि सुक्रतू ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 2.11.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मित्र और वरुण देवता अच्छे काम करने वाले हैं. ये देवता हमारी गायों के समूह को घी दूध से सीचें. ये देवता परलोकों को भी मधुर रस (अमृत) से सींचें. (७)

EN English Translation

Friends and Varun Devta are going to do good work. These gods should irrigate our group of cows with ghee milk. These gods should also water the hereafter with sweet juice (nectar). (7)

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