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सामवेद

Chapter / Prapathak 2 • Dashati / Sukta 12 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 2 • दशती / सूक्त 12 • मन्त्र 1

2.12.1

Mantra ID: 2.12.1

अतीहि मन्युषाविणँ सुषुवाँसमुपेरय । अस्य रातौ सुतं पिब ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 2.12.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जो यजमान क्रोधित हो कर सोमरस निचोड़े, आप उसे स्वीकार मत कीजिए. जो अच्छे विधिविधान से सोमरस निचोड़े, आप उसी के यज्ञ में सोमरस ग्रहण कीजिए. (१)

EN English Translation

O Indra! Do not accept the host who gets angry and squeezes somerus. Those who squeeze someras with good law, you should take someras in his yajna. (1)

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