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सामवेद

Chapter / Prapathak 2 • Dashati / Sukta 8 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 2 • दशती / सूक्त 8 • मन्त्र 6

2.8.6

Mantra ID: 2.8.6

क इमं नाहुषीष्वा इन्द्रँ सोमस्य तर्पयात् । स नो वसून्या भरात् ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 2.8.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मनुष्यों में ऐसी क्षमता कहां, जो इंद्र को तृप्त कर सकें? वे हमारे यज्ञ में तृप्त हों तथा हमें धन प्रदान करें. (६)

EN English Translation

Where in humans can satisfy Indra? May they be satisfied in our yajna and give us wealth. (6)

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