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सामवेद

Chapter / Prapathak 2 • Dashati / Sukta 9 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 2 • दशती / सूक्त 9 • मन्त्र 4

2.9.4

Mantra ID: 2.9.4

आ त्वा विशन्त्विन्दवः समुद्रमिव सिन्धवः । न त्वामिन्द्राति रिच्यते ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 2.9.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! जैसे नदियां समुद्र में मिलती हैं, वैसे ही सोमरस आप में मिलता है. आप से बढ़ कर कोई महान नहीं है. (४)

EN English Translation

O Indra! Just as rivers meet in the sea, so someras is found in you. There is no greater than you. (4)

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