Samaveda Quick Jump
Navigate to any Chapter / Prapathak or Mantra
20.1.6
प्रत्नं पीयूषं पूर्व्यं यदुक्थ्यं महो गाहद्दिव आ निरधुक्षत । इन्द्रमभि जायमानँ समस्वरन् ॥ (६)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
सामवेद मन्त्र 20.1.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अमृत तुल्य सोमरस अपूर्व और सर्वश्रेष्ठ है. यह स्वर्गलोक से प्रकट हुआ. इंद्र के सामने यजमान मंत्र गागा कर सोम की स्तुति करते हैं. (६)
EN English Translation
Amrit-like Someras is unique and the best. It appeared from heaven. In front of Indra, the host praises Som by singing the mantra. (6)