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सामवेद

Chapter / Prapathak 20 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 20 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 6

20.2.6

Mantra ID: 20.2.6

अजीजनो अमृत मर्त्याय अमृतस्य धर्मन्नमृतस्य चारुणः । सदासरो वाजमच्छा सनिष्यदत् ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 20.2.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप अमृतमय हैं. आप मनुष्यों के लिए सत्य और मंगलकारी तत्त्व धारण करते हैं. आप ने सूर्य को प्रकट किया, देवगण की सेवा की और सदैव यजमानों को अन्न, धन देने हेतु लालायित रहते हैं. (६)

EN English Translation

O Mon! You are nectar. You possess true and auspicious elements for human beings. You have revealed the sun, served the gods and are always eager to give food and money to the hosts. (6)

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