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सामवेद

Chapter / Prapathak 20 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 20 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 4

20.3.4

Mantra ID: 20.3.4

यस्माद्रेजन्त कृष्टयश्चर्कृत्यानि कृण्वतः । सहस्रसां मेधसाताविव त्मनाग्निं धीभिर्नमस्यत ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 20.3.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमानो! आप बुद्धिपूर्वक अग्नि को नमन कीजिए. आप हजारों बुद्धिपूर्वक कार्यो से उन की उपासना कीजिए, जिस से अग्नि कर्तव्यपरायण यजमानों के लिए शत्रुपक्ष को बहुत पीड़ित कर सकें. (४)

EN English Translation

O hosts! You bow down to agni wisely. Worship them with thousands of wise deeds, so that the agni can cause a lot of suffering to the enemy for the dutiful hosts. (4)

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