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सामवेद

Chapter / Prapathak 20 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 20 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 7

20.3.7

Mantra ID: 20.3.7

अग्निरृषिः पवमानः पाञ्चजन्यः पुरोहितः । तमीमहे महागयम् ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 20.3.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि ऋषि हैं. वे पवित्र, पुरोहित, पंच व सर्वद्रष्टा हैं. हम उन के गुण गाते हैं. (७)

EN English Translation

Agni is a sage. He is holy, priest, panch and all-perishta. We sing the virtues of them. (7)

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