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सामवेद

Chapter / Prapathak 20 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 20 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 7

20.4.7

Mantra ID: 20.4.7

अग्ने नक्षत्रमजरमा सूर्यँ रोहयो दिवि । दधज्ज्योतिर्जनेभ्यः ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 20.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप लोगों के लिए ज्योति धारण कीजिए. आप स्वर्गलोक में सूर्य को स्थापित कीजिए. जर्जर न होने वाले सूर्य सर्वत्र प्रकाशदाता हैं. (७)

EN English Translation

O agni! Don't light up for you guys. You install the sun in heaven. The sun, which is not dilapidated, is the giver of light everywhere. (7)

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