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सामवेद

Chapter / Prapathak 20 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 20 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 9

20.4.9

Mantra ID: 20.4.9

अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम् । अपाँ रेताँसि जिन्वति ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 20.4.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप मूर्धन्य, स्वर्गलोकवासी व पृथ्वी के पालनहार हैं. आप जलों को अपने में समाहित किए रहते हैं. (९)

EN English Translation

O agni! You are foolish, heavenly and sustainer of the earth. You keep the water absorbed in you. (9)

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