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21.4.2
यं जनासो हविष्मन्तो मित्रं न सर्पिरासुतिम् । प्रशँसन्ति प्रशस्तिभिः ॥ (२)
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सामवेद मन्त्र 21.4.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! हम हविदाता आप के मित्र हैं. आप बहुत पूजनीय हैं. हम वैदिक प्रशस्तियों से आप की प्रशंसा करते हैं. (२)
EN English Translation
O agni! We are your friends. You are very revered. We admire you from Vedic testimonies. (2)