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सामवेद

Chapter / Prapathak 21 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 21 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 7

21.4.7

Mantra ID: 21.4.7

उप त्वा जामयो गिरो देदिशतीर्हविष्कृतः । वायोरनीके अस्थिरन् ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 21.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! हमारी स्तुतियां बहनों के समान आप का गुण गाती हैं. हम वायु की सहायता से आप को प्रज्वलित करते हैं. हम यज्ञ स्थान में आप की स्थापना करते हैं. (७)

EN English Translation

O agni! Our praises sing your praises like sisters. We ignite you with the help of air. We establish you in the yajna place. (7)

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