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सामवेद

Chapter / Prapathak 22 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 22 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 3

22.2.3

Mantra ID: 22.2.3

इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रयत्यध्वरे । इन्द्रँ समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 22.2.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम यज्ञ में व वीर भक्तगण संग्राम में आप को आमंत्रित करते हैं. हम धन हेतु आप का आह्वान करते हैं. (३)

EN English Translation

O Indra! We invite you to the yagna and the brave devotees to the struggle. We call on you for money. (3)

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