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सामवेद

Chapter / Prapathak 25 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 13

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 25 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 13

25.1.13

Mantra ID: 25.1.13

त्वमङ्ग प्र शुँसिषो देवः शविष्ठ मर्त्यम् । न त्वदन्यो मघवन्नस्ति मर्डितेन्द्र ब्रवीमि ते वचः ॥ (१३)

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सामवेद मन्त्र 25.1.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप हमारी प्रशंसा करते हैं. आप सब से बढ़िया सुख देते हैं. हम आप ही से प्रार्थना करते हैं, क्योंकि आप के अतिरिक्त कोई दूसरा उतना धनवान और सुखदायक नहीं है. (१३)

EN English Translation

O Indra! You praise us. You give the best happiness. We pray to you, because no one is so rich and soothing except you. (13)

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