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सामवेद

Chapter / Prapathak 25 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 25 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 7

25.4.7

Mantra ID: 25.4.7

आ भात्यग्निरुषसामनीकमुद्विप्राणां देवया वाचो अस्थुः । अर्वाञ्चा नूनँ रथ्येह यातं पीपिवाँसमश्विना घर्ममच्छ ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 25.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अन्नि प्रज्वलित हो गए हैं. उषा के प्रकट होते ही अग्नि प्रज्वलित हो जाते हैं. दिव्य प्रार्थनाएं शुरू हो गई हैं. अश्विनीकुमार रथ में विराज गए हैं. हम उन से सोमरस पीने के लिए यज्ञ में पधारने का अनुरोध करते हैं. (७)

EN English Translation

Anni has ignited. As soon as Usha appears, the agni ignites. Divine prayers have begun. Ashwinikumar has gone to sit in the chariot. We request them to come to the yagna to drink someras. (7)

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