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सामवेद

Chapter / Prapathak 25 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 25 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 2

25.5.2

Mantra ID: 25.5.2

उदपप्तन्नरुणा भानवो वृथा स्वायुजो अरुषीर्गा अयुक्षत । अक्रन्नुषासो वयुनानि पूर्वथा रुशन्तं भानुमरुषीरशिश्रयुः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 25.5.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उषा के आते ही लाल किरणें आकाश में छा गई हैं. अपनेआप जुते हुए रथ से वे चेतना फैलाती हैं तथा सूर्य की सेवा करती हैं. (२)

EN English Translation

As soon as Usha arrives, red rays have covered the sky. With a chariot plowed on their own, they spread consciousness and serve the sun. (2)

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