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सामवेद

Chapter / Prapathak 25 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 25 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 4

25.5.4

Mantra ID: 25.5.4

अबोध्यग्निर्ज्म उदेति सूर्यो व्यू३षाश्चन्द्रा मह्यावो अर्चिषा । आयुक्षातामश्विना यातवे रथं प्रासावीद्देवः सविता जगत्पृथक् ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 25.5.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि वेदी में प्रज्वलित हो गए हैं. सूर्य आकाश में उदित हो गए हैं. उषा महान हैं. वे अपनी तेजस्विता से सब को प्रसन्न कर देती हैं. हे अश्विनीकुमार! आप अपने घोड़े रथ में जोतिए, यहां प्रस्थान करिए. सूर्य सभी को अलगअलग कार्य करने की प्रेरणा दे रहे हैं. (४)

EN English Translation

Agni has ignited in the altar. The sun has risen in the sky. Usha is great. They make everyone happy with their brilliance. O AshwiniKumar! You plough your horse in the chariot, leave here. The sun is inspiring everyone to work differently. (4)

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